Tuesday, 18 October 2016

30 किलोमीटर लम्बी 50 हज़ार लोगों ने लिया हिस्सा, लोगो को जागरूक करने के लिए बनाई मानव श्रृंखला ।

बुलंदशहर। भारतीय संविधान में वोटिंग के अधिकार को बहुत महत्व दिया गया है। असल ज़िन्दगी में इस अधिकार का प्रयोग कितने लोग कर पाते हैं, इसका अनुमान लगाना कठिन है पर बुलंदशहर में वोटरों को जागरूक करने का अभियान चलाया गया। लोगो ने आज सुबह सिटी के सभी रास्तों पर खड़े होकर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई। इस मानव श्रृंखला को बनाने की मकसद आम जनता में वोटिग अवेअरनेस और स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

यूपी में आने वाले चुनावों को लेकर आम आदमी कितना जागरूक है यह तो कोई नहीं बता सकता है। लेकिन लोगों को अपने चुनावी अधिकार का प्रयोग कैसे और किस प्रकार करना है इसको मद्देनज़र रखते हुए बुलंदशहर की जनता आज सड़कों पर उतर आई। बुलंदशहर के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सोमवार की सुबह काला आम चौराहे से नगर के अन्दर जाने वाले सभी मार्गो पर मानव श्रंखला बनाई। डीएम ने शान्ति का प्रतीक कबूतर व गुब्बारों को आसमान में उडाकर मानव श्रंखला का शुभारम्भ किया। डीएम ने राष्ट्रीय मतदाताओं को जागरूक करने के उद्देश्य से शपथ समारोह कार्यक्रम का आयोजन भी किया।



इस मानव श्रृंखला में तमाम सामाजिक संगठन, स्कूली बच्चे, सरकारी कर्मचारी शामिल थे। इस तरह लोगों को मतदान करने की अपील की गई साथ साथ शपत दिलाई गई। वोटिंग का अधिकार हम सही तरह प्रयोग करेंगे। मानव श्रृंखला में 50 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें महिलाओं की तादाद सबसे ज्यादा थी। लोगों ने हाथ से श्रृंखला बनाते हुए लोकतान्त्रिक अधिकार की अहमियत बताई।



लोगों के हाथों में थे वोटर जागरूकता स्लोगन्स और बैनर
मानव श्रृंखला काला आम स्थित शहीद स्तम्भ से शुरू होकर पूरे बुलंदशहर सिटी में फैली थी। अठारह साल पूरे कर चुके युवाओं को वोटिंग अधिकार का सही प्रयोग करने की शपथ दिलाई गई। प्रशासन द्वारा लगे जा रहे विशेष वोटर जागरूकता अभियान की भी जानकारी दी। लोगों द्वारा यह दावा किया जा रहा बुलंदशहर में किया जा रहा यह कार्यक्रम अब तक का सबसे विशेष था।



डीएम ने किया स्वच्छता के प्रति जागरूक
डीएम ने इस अवसर पर स्वच्छ भारत एक कदम स्वच्छता की ओर कार्यक्रम की शपथ दिलायी। मैं न गंदगी करूंगा न किसी और को करने दूंगा। सबसे पहले मैं स्वयं से मेरे परिवार से, मेरे मुहल्ले से, मेरे गांव से, मेरे कार्यालय स्थल से शुरूआत करूंगा। मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते है उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते है और न ही होने देते है। इस विचार के साथ मैं गांव-गांव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा।

18 वर्ष की आयु पूरी करने जुडाव ले नाम
डीएम ने काला आम चौराहे से मतदाता जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर जनपद के विभिन्न गांव व कस्बों में जाकर लोगों को मतदाता जागरूकता के बारे में प्रचार प्रसार करेगा। डीएम ने लोगों से अपील की कि जिन छात्र/छात्राओं व अन्य जिनकी आयु 1 जनवरी 2017 को 18 वर्ष पूर्ण हो रही है वह अपना मतदाता लिस्ट में नाम अवश्य जुड़वा लें।

18 वर्ष की आयु पूरी करने जुडाव ले नाम
डीएम ने काला आम चौराहे से मतदाता जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर जनपद के विभिन्न गांव व कस्बों में जाकर लोगों को मतदाता जागरूकता के बारे में प्रचार प्रसार करेगा। डीएम ने लोगों से अपील की कि जिन छात्र/छात्राओं व अन्य जिनकी आयु 1 जनवरी 2017 को 18 वर्ष पूर्ण हो रही है वह अपना मतदाता लिस्ट में नाम अवश्य जुड़वा लें।


Source  :  http://voinews.in/human-chain-by-making-people-aware-of-the-vote/

Monday, 10 October 2016

सीएम को खून से खत लिखने वाली बेटियों की आर्थिक मदद डकार गया ‘कलयुगी मामा’

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को खून से चिठ्ठी लिखने वाली बेटियों की आर्थिक मदद उनका पैरोकार मामा गटक गया है. सरकार से मिले 5 लाख रूपये के चेक को बेटियों के मामा ने अपना बताकर हड़प लिया और बेबस बेटियां फिर से कलेक्टर और नेताओं की चौखट पर मदद के लिए भटक रही हैं.
बुलंदशहर की दो बहने लतिका और तान्या बंसल ने अपनी मदद के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को खून से चिठ्ठी लिखी थी. चिठ्ठी सीएम के दिल को छू गई. जिसके बाद अखिलेश यादव ने बेटियों को लखनऊ बुलाकर उनको मदद का वायदा किया था. महीने भर बाद 5 लाख रूपये की मदद का चेक मुख्यमंत्री ने बेटियों को भेजा. लेकिन उन पैसों को बेटियों का मामा डकार गया.
सीएम को खून से खत लिखने वाली बेटियों की आर्थिक मदद डकार गया ‘कलयुगी मामा’

बेटियों का चेक डकारने वाले मामा तरूण जिंदल की दलील है कि यह मदद बेटियों के लिए नहीं, उसकी मां के इलाज के लिए है. उन्होने बताया कि जून-2106 में सीएम से मां की मदद के लिए आवेदन किया था, यह वही रकम है.
ज्ञातव्य है कि लतिका और तान्या की मां की घर में जलकर मौत हो गई. थी. मौत के बाद मामा के पास आकर बेटियों ने आरोप लगाया कि पिता और उनके परिजनों ने उनकी मां की हत्या की है. पुलिस ने पिता मनोज को इस मामले में जेल भेज दिया. जबकि केस के बाकी आरोपियों पर जांच चल रही है.
मामा तरूण जिंदल ने बेटियों की 78 साल की दादी, दो बुआ-फूफा, चाचा-चाची समेत 8 लोगों को केस में नामजद कराया था जो मुरादाबाद और खुर्जा में रहते हैं. तरूण जिंदल पर ये भी आरोप है कि उसने आरोपियों से वसूली करने के लिए उन्हें झूठा नामजद कराया था. उसने इस दौरान उनसे एक करोड़ रूपये भी मांगे थे.
मामा तरूण जिंदल की धोखेबाजी से जिला प्रशासन स्तब्ध है. जिलाधिकारी अन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि बीमारी के लिए शासन से मदद का प्रोसेस अलग होता है. उसमें जिलाधिकारी का दखल रहता है. लेकिन बेटियों को जो 5 लाख रूपये का चेक दिया गया है वह मुख्यमंत्री कार्यालय से बेटियों की मदद के लिए भेजा गया है. बेटियों की नानी ओमवती उनकी संरक्षक है क्योंकि दोनों ही नाबालिग हैं. इसलिए चेक नानी के नाम से भेजा है.
बेटियों का हक डकारने वाले मामा ने ही सोशल मीडिया पर फोटो और पोस्ट डाले थे. जिसके बाद यह मामला टीवी और अखबार की सुर्खियां बन गया. आजकल बेटियां अपनी नानी के घर पर है और नानी और मामा उनके सरपरस्त हैं. वो बेटियों को फिर से नेताओं और अफसरों के दरवाजे तक भेज रहे हैं. हाल ही में बुलंदशहर आए राहुल गांधी के सामने भी उसने बेटियों को फरियाद करने के लिए आगे कर दिया था.

Source:  http://hindi.pradesh18.com/news/uttar-pradesh/bulandshahr/bulandshahr-uncle-takes-cm-relief-money-to-minor-sisters-1495136.html

बेबस परिवार मांग रहा है सीएम अखिलेश से मौत की भीख

बुलंदशहर में एक बेबस परिवार यूपी के सीएम अखिलेश यादव से मौत की भीख मांग रहा है. बेबसी और मजबूरी का शिकार ये परिवार भुखमरी से जूझ रहा हैं. मनोज और उनके परिवार ने यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चिठ्ठी लिखकर इच्छा-मृत्यु की मांग की है.
बता दें, कि सिकन्द्राबाद से 3 किलोमीटर दूर मंडावरा गाँव के निवासी मनोज प्रजापति स्कूल वैन चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते थे. उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे है. 9 अगस्त 2013 को मनोज अपने बच्चो के लिए झूला डालते वक्त पेड़ से गिर गये और उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया.
बेबस परिवार मांग रहा है सीएम अखिलेश से मौत की भीख

वहीं मनोज बताते है कि वो हादसा क्या जिंदगी पर टूटा एक पहाड़ था जिसके नीचे अब तक पूरा परिवार तबाह हो गया.
मनोज ने बताया कि जिस परिवार को बड़े शान से पालता है, वो खत्म हो गया. उलटे मुझे अब हर वक्त सहारे की जरूरत है. ऐसी जिंदगी से तो मौत भली थी. उन्होंने कहा कि बेटी की शादी के लिए एक प्लाट खरीदा था, उसे इलाज के लिए बेच दिया.
वहीं रोजगार का जरिया एक वैन थी उसे भी बेच दिया. वहीं मकान गिरवी रखा है. गाँव के दर्जन भर लोगों का कर्जा चढ़ गया है. कल के लिए कोई उम्मीद नही दिखाई देती. मैं बेड पर पड़ा हूँ और पत्नी दूसरो के घरो में मजदूरी कर रही है.
बच्चों की ओर देखती हुई मनोज की पत्नी कोमल बताती है कि बड़ी बेटी को पढ़ाने का सपना देखा था. अपने पाँव पर खड़ी हो जायेगी। लेकिन कालेज पहुँचने से पहले ही उसकी पढ़ाई रूक गयी.

source:  http://hindi.pradesh18.com/news/uttar-pradesh/bulandshahr/man-seeks-mercy-death-in-bulandshar-1494386.html

शहादत के 22 महीनों बाद भी नौकरी के लिए भटक रही है शहीद की विधवा

मेरठ में शहादत देने वाले जांबाज सिपाही एकांत यादव की पुलिस विभाग के अफसरों ने अनदेखी की है. शहादत के 22 महीने बाद भी शहीद एकांत की पत्नी अंशू नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली.
अंशू के पति एकान्त ने 1 दिसंबर 2014 को मेरठ के कुख्यात नूरइलाही उर्फ नूरा को मुठभेड़ में मार डाला था और खुद भी लड़ते हुए शहीद हो गए.
शहादत के 22 महीनों बाद भी नौकरी के लिए भटक रही है शहीद की विधवा
बुलंदशहर के नगला काला के निवासी यूपी पुलिस के सिपाही एकांत यादव 1 दिसंबर 2014 को मेरठ में उस वक्त शहीद हुए जब वह पुलिस पिकेट पर गश्त के लिए निकले थे. उसी दौरान उनकी मुठभेड़ कुख्यात नूरइलाही उर्फ नूरा से हुई. नूरा ने गोलियां चलाई तो एकांत और उनके साथी लोकेश ने उसे दबोचकर ढेर कर दिया. इस मुठभेड़ में एकांत को पेट में गोली लगी और वह शहीद हो गए.
उनकी शहादत पर फक्र करते हुए मेरठ के तत्कालीन आईजी आलोक शर्मा ने उनकी पत्नी को नौकरी और 27 लाख रूपये के मुआवजे का ऐलान किया था. लेकिन शहादत के बाद पुलिस के अधिकारी सब कुछ भूल गए.
एकांत की पत्नी अंशू यादव 22 महीनों से नौकरी के लिए परेशान है, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं.
बता दें अंशू और एकांत की शादी 5 जुलाई 2014 को हुई थी. अंशू ने शादी के महज 5 महीनो में ही अपना सुहाग खो दिया. सरकार एकांत की शहादत का सम्मान करती रही और पुलिस के अफसर उस शहादत की बेकदरी. हैरत की बात ये है कि नौकरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अंशू ने जी-तोड़ मेहनत करके फिजीकल टेस्ट भी पास कर लिया. लेकिन इसके बाद नौकरी की फाइल आईजी मेरठ के आफिस से गायब हो गई.
अंशू की फरियाद अब न अफसर सुनते है और न आईजी आफिस के बाबू.


Source: http://hindi.pradesh18.com/news/uttar-pradesh/bulandshahr/martyrs-widow-still-awaiting-govt-job-in-bulandshahr-1495121.html

व्हाट्सएप्प से दिखानी होगी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी, शिक्षकों में हड़कंप

यूपी के बुलंदशहर में सरकारी स्कूलों के शिक्षक इन दिनों खासे परेशान है. टीचरों की परेशानी ही वजह है जिलाधिकारी की नई मुहिम.
स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के लिए डीएम की इस मुहिम के तहत अब टीचरों को अपनी और स्कूली बच्चों की व्हाट्सएप्प के जरिये हाजिरी लगानी है.

व्हाट्सएप्प से दिखानी होगी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी, शिक्षकों में हड़कंप
इस मुहिम की अनदेखी करने और स्कूलो से गैरहाजिर डेढ़ हजार टीचरों का डीएम ने वेतन रोक दिया है.
बुलंदशहर के जिलाधिकारी आञ्जनेय कुमार सिंह बताते है कि स्कूलों में मिड-डे-मील, मास्टरों की गैरहाजिरी और शिक्षा गुणवत्ता को लेकर उनके पास जब शिकायतों के अंबार लग गए तो उन्होंने बेसिक शिक्षा के खंड शिक्षा अधिकारियो से व्हाट्सएप्प ग्रुप के जरिये स्कूलों की हाजिरी लगवाने की मुहिम शुरू की.
इस मुहिम के तहत स्कूल की प्रार्थना सभा, मिड-डे-मील वितरण के वक्त और स्कूलों की छुट्टी के वक्त के फोटो इलाके के संबधित ग्रुप पर भेजने होते हैं.
बता दें, कि जिले के 2395 स्कूलों में से 1500 स्कूलों के हेडमास्टर का वेतन रोक दिया गया है. इन शिक्षकों ने डीएम के आदेशो का पालन ठेंगे पर रख दिया था.
इसके अलावा छापेमारी में लापता मिले 107 शिक्षकों का एक दिन का वेतन भी डीएम के आदेश से काटा गया है.


Source:  http://hindi.pradesh18.com/news/uttar-pradesh/bulandshahr/attendence-of-childrens-in-goverment-schools-by-whatsup-picture-1493380.html